
Karnataka कर्नाटक: उत्तर कन्नड़ जिला के होन्नावर तालुक स्थित होसाकुली ग्राम पंचायत क्षेत्र में आने वाले डोड्डाहिट्टालकेरे गांव में आज़ादी के सात दशक से अधिक समय बाद भी बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी बनी हुई है। गांव के लोगों के अनुसार, यहां अब तक पक्की सार्वजनिक सड़क और भास्करी नदी पर पुल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण हर साल मानसून के दौरान जीवन बेहद कठिन हो जाता है।
इस गांव में लगभग 50 से अधिक घर हैं और 150 से ज्यादा लोग रहते हैं, लेकिन आज भी लोग अपने दैनिक आवागमन के लिए निजी बागानों और कृषि भूमि के बीच बने संकरे और अस्थायी रास्तों पर निर्भर हैं। इन रास्तों की स्थिति बारिश के मौसम में और भी खराब हो जाती है, जिससे गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से लगभग टूट जाता है।
गांव की यह गंभीर स्थिति हाल ही में 1 जुलाई को सामने आई, जब एक दुखद घटना के दौरान ग्रामीणों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गांव के निवासी क्रिस्टन जोसेफ रोड्रिग्स की मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए शव को ले जाना था, लेकिन भास्करी नदी में आई बाढ़ और पानी के तेज बहाव के कारण ग्रामीणों को ताबूत को गर्दन तक भरे पानी से होकर ले जाना पड़ा। यह दृश्य बेहद दर्दनाक और चुनौतीपूर्ण था, जिसने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता पैदा कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति पहली बार नहीं हुई है, बल्कि हर मानसून में उन्हें इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना, बच्चों को स्कूल पहुंचाना और आवश्यक सामान लाना-ले जाना बेहद जोखिम भरा हो जाता है। गांव में पुल और पक्की सड़क न होने के कारण आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कई वर्षों से लगातार सरकारों और प्रशासन से सड़क और पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि हर चुनाव के समय वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने पर गांव लगभग पूरी तरह से कट जाता है। इस दौरान बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजमर्रा की जरूरतें गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं। कई बार लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पानी पार करने को मजबूर होते हैं।
होसाकुली ग्राम पंचायत क्षेत्र के तहत आने वाले इस गांव की स्थिति ने एक बार फिर ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे की कमी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलाकों में सड़क और पुल निर्माण न केवल विकास का मुद्दा है, बल्कि यह जीवन सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
गांव की स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पुल और सड़क का निर्माण नहीं किया गया, तो हर साल मानसून में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अब तक कई बार लिखित और मौखिक रूप से अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचा चुके हैं, लेकिन परिणाम न के बराबर रहा है। इसी कारण लोगों में नाराजगी और निराशा दोनों बढ़ती जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर किया है, जहां आधुनिक विकास की बातों के बीच कई गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द भास्करी नदी पर पुल का निर्माण किया जाए और गांव को मुख्य सड़क से जोड़ा जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक स्थितियों से बचा जा सके।





